आजकल के समय में क्रेडिट कार्ड रखना लक्जरी माना जाता है। इस टॉपिक में हम आपको क्रेडिट कार्ड की पूरी जानकारी देंगे। जैसे की क्रेडिट कार्ड क्या होता है?। इसके क्या फायदे और नुकसान हैं। और अंत में हम आपको बताएंगे कि क्या आपको क्रेडिट कार्ड रखना चाहिए या नहीं।

क्रेडिट कार्ड क्या होता है?

क्रेडिट कार्ड प्लास्टिक या धातु का एक आयताकार टुकड़ा होता है, जो बैंकों और वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनियों द्वारा जारी किया जाता है। इसके अगले भाग पर सोलह अंकों की कार्ड संख्या, कार्ड की वैधता, समाप्त होने की तिथि, और कार्ड धारक का नाम लिखा होता है। इसमें एक चिप भी लगी होती है जो ट्रांजेक्शन करते समय कार्ड धारकों की जानकारी को सत्यापित करती है और पेमेंट पूरा होता है। ध्यान दें कि पेमेंट पूरा होने के लिए पिन देना पड़ता है, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है और ये पिन सिर्फ आपको ही पता होना चाहिए। क्रेडिट कार्ड के पिछले हिस्से पर काले रंग की चुंबकीय पट्टी, कार्ड होल्डर के हस्ताक्षर, होलोग्राम और तीन अंकों का सीवीसी कोड अंकित होता है। यह सीवीसी कोड भी बहुत जरूरी होता है, क्योंकि जब आप ईकोमर्स वेबसाइट पर क्रेडिट कार्ड से कोई भुगतान करते हैं, तो कार्ड नंबर और कार्ड की वैधता तिथि के साथ साथ आपको ये सीवीसी कोड भी देना पड़ता है, तब जाके आपका भुगतान सत्यापित और सफल होता है।

क्रेडिट कार्ड की विशेषताएं।

क्रेडिट कार्ड में उसके धारकों को बैंक द्वारा दिए गए खर्च करने की सीमा दी जाती है। जिसके अंतर्गत वो धारक महीने भर चीजों को खरीदने के लिए इस्तेमाल करता है और सारे भुगतान उसी कार्ड से करता है। एक व्यक्ति क्रेडिट कार्ड से एटीएम मशीन पर जाकर पैसे भी निकाल सकता है, लेकिन इस पर कोई ग्रेस पिरियड नहीं दिया जाता है, और ब्याज 3 से 5 % तक लगता है। कानून के अनुसार क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी को कार्ड धारकों को ग्रेस पिरियड दिया जाना चाहिए। क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली बैंक और कंपनी एक व्यक्ति की क्रेडिट रेटिंग के तौर पर पैसे उधार देने की सीमा निर्धारित करती है। कार्ड धारकों द्वारा खर्च किए गए पैसे को लौटाने की अवधी बैंक द्वारा पहले से निर्धारित होती है, जिसकी अंतिम तिथि से पहले उस कार्ड उपयोगकर्ता को सारे पैसे और उस पर लगे ब्याज के साथ उस बैंक को लौटाना होता है। ये ब्याज बैंक दर बैंक भिन्न भिन्न होती है।

क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कम्पनियों में American Express, Visa और Mastercard अग्रणी है, लेकिन इसके अलावा State Bank Of India, ICICI Bank, जैसी बैंक भी क्रेडिट कार्ड की सुविधा और सेवाएं देती है। आजकल के जमाने में तो क्रेडिट कार्ड के बहुत से नए रुप चलन में आ गए हैं। उसमें से एक डेबिट कार्ड है, जो किसी भी बड़े बैंक में खाता खुलाने पर अपने आप ही मिल जाता है। इसके लिए क्रेडिट स्कोर की जरूरत नहीं पड़ती है, जबकि अच्छे क्रेडिट स्कोर के बिना क्रेडिट कार्ड नहीं मिलता है। क्रेडिट कार्ड से मिलता जुलता एक चार्ज कार्ड होता है, जिसमें एक महिने या निर्धारित की गई समय सीमा में कार्ड धारक द्वारा खर्च किए गए पैसे एक साथ पूरे लौटाने पड़ते हैं । लेकिन क्रेडिट कार्ड में बकाया को अगले महीने तक टाला जा सकता है। मगर इस पर ब्याज लगता है। आजकल क्रेडिट कार्ड के विकल्प में डेबिट कार्ड के साथ साथ mobile payments, डिजिटल वॉलेट, बैंक ट्रांसफर, buy now or, pay later, जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

क्या आपको क्रेडिट कार्ड की जरूरत है?

क्रेडिट कार्ड की आपको जरूरत है या नहीं, ये तय करने के लिए आपको इसके फायदे और नुकसान के बारे में पता होना चाहिए। तभी आप फैसला कर पाने में सक्षम होंगे कि आपको इसकी जरूरत है, या नहीं।

अब बात करते हैं क्रेडिट कार्ड के फायदों की ।

आपके पास क्रेडिट कार्ड होने से आप अपना क्रेडिट बना सकते हैं। क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी आपके खाते की जानकारी और भुगतान गतिविधियों को कंस्यूमर क्रेडिट ब्यूरो को देती है। इससे आपको लाभ ये होता है कि जब आप किसी बैंक में किसी लोन के लिए आवेदन देते हैं, तो आपको लोन आसानी से मिल जाता है। क्योंकि जितना आप क्रेडिट कार्ड से पैसे खर्च करते हैं और समय पर उसका बकाया भरते हैं, उतनी ही अच्छी आपकी क्रेडिट हिस्ट्री होती जाती है।

क्रेडिट कार्ड आपको रिवार्ड्स भी देती है जैसे कि कैश बैक, कैश बोनस और माइल्स। जिसे आप यात्रा करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं या पॉइंट्स को आप कुछ खरीदने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपके कार्ड से किए गए खर्च पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए आप 3000 रुपए खर्च करने पर 500 कैश बोनस पा सकते हैं, अगर आप अपना खाता खुलाने के तीन महीने के अंदर ये भुगतान करते हैं।

क्रेडिट कार्ड आपको आपातकालीन स्थिति में वित्तीय मदद दे सकती है। मान लीजिए कि बीच सड़क पर आपकी गाड़ी खराब हो गई है और इसे मरम्मत करने में बहुत बड़ी रकम लगेगी, जो पैसे अभी आपके सेविंग्स खाते में नहीं है। तो आप इस स्थिति में अपने कार्ड से पेमेंट कर सकते हैं और बैंक आपकी तरफ से पैसे का भुगतान करेगी। कुछ कंपनी या बैंक 0% एपीआर, (Annual Percentage Rate), का ऑफर कार्ड धारकों को देती है, जिसका इस्तेमाल करने की समय सीमा तक आप कुछ भी खरीदेंगे तो उस पर 0% ब्याज लगेगा। इसका मतलब आप जितने की खरीदारी करेंगे, उतने ही पैसे आप बैंक को वापस देंगे।

क्रेडिट कार्ड से कुछ खरीदने पर आपको किसी प्रोडक्ट्स की बढ़ी हुई वारंटी मिल सकती है। चोरी हुए या खोई हुई वस्तु के खरीदारी पर आपको खरिदारी की सुरक्षा मिलेगी, और अगर आपका खरीदा हुआ सामान टूटा फूटा या खराब निकलता है या जैसा विज्ञापन में दिखाया गया है, सामान वैसा नहीं है, तो आप क्रेडिट कार्ड की कंपनी से इसे वापस करवाने के लिए कह सकते हैं। कुछ क्रेडिट कार्ड ट्रेवल insurance या कार rental insurance भी ऑफर में देती है।

क्रेडिट कार्ड से होने वाले नुक़सान।

क्रेडिट कार्ड जितना आपकी खरीदारी को आसान करता है, उतनी ही मुश्किल और पेचीदा इसके नियम और शर्तें हैं। जिसे समझने में अगर आपसे थोड़ी भी चूक हो गई तो आप बहुत बड़े कर्जे के जाल में फंस सकते हैं। अगर आप अपनी बकाया राशि का भुगतान नहीं करते हैं, तो कार्ड जारीकर्ता आपसे दूसरे लोन के मुकाबले में बहुत ज्यादा ब्याज लेते हैं। भारत की लगभग सभी क्रेडिट कार्ड कंपनी 30 से 40 प्रतिशत ब्याज दर क्रेडिट कार्ड के खर्च पर लगाती है। प्रति महीने में यही ब्याज दर दो पॉइंट पांच से तीन पॉइंट पांच प्रतिशत तक होता है। तो मान लीजिए कि आपके कार्ड का ब्याज दर 40 प्रतिशत है और आप अपने कार्ड से हर महीने दस हजार खर्च करते हैं तो पूरे साल का खर्च एक लाख बीस हजार हो जाएगा। अगर इस पर हम 40 प्रतिशत का ब्याज लगा दें, तो यही आपका खर्च एक लाख अढसठ हजार हो जाएगा, मतलब 48 हजार आपको सिर्फ ब्याज ही लग जाएगा। हां हम मानते हैं कि आप ऐसे लगातार पूरे साल तो क्रेडिट कार्ड का पेमेंट करने से तो नहीं चूकेंगे। लेकिन अगर आप हर महीने भी पेमेंट ड्यू डेट के बाद क्रेडिट कार्ड बिल भरेंगे तो पूरे साल का लगभग इतना ही ब्याज पड़ जाएगा। इसलिए क्रेडिट कार्ड को लेते समय और उसका इस्तेमाल करते समय, सतर्क रहने की जरूरत है, वरना आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।

आजकल कई कार्ड कंपनी 0% एपीआर देकर कार्ड धारकों को लुभाने के लिए भी इस्तेमाल करती है। यह सुनने में अच्छा लग सकता है, लेकिन ये लंबे समय के लिए ठीक नहीं होता है, क्योंकि प्रोमोशनल पिरियड सिर्फ नौ से पंद्रह महीने तक की ही होती है, जिसके खत्म होने के बाद आप अचानक पाओगे कि आप बहुत ज्यादा ब्याज दे रहे हो। ध्यान रखें कि ये ब्याज ही इन कंपनियों की कमाई का मुख्य स्रोत है।

कार्ड कंपनी जो आपको ऑफर या कैश बैक देती है, इसकी वजह से आप ऐसी चीजें खरीदने लग जाते हैं जिसकी शायद आपको जरूरत भी न हों। रिसर्चरों ने तो ऐसा पाया है कि जो लोग क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं वो ज्यादा महंगी चीजें खरीदने और अस्वस्थ खाना खाने लगते हैं। क्योंकि जब आप कार्ड से पैसे खर्च करते हैं तो आपको पैसे के खर्च होने का उतना एहसास नहीं होता है। जितना कैश से या बचत खाते में से जमा किए गए पैसे खर्च करने पर होता है। इसीलिए महंगी चीजें खरीदने से पहले आप ज्यादा सोचते नहीं हैं। क्योंकि आपके दिमाग में चल रहा होता है कि ये पेसे तो हमको अगले महीने देने पड़ेंगे। बताईए दोस्तों ऐसा ही होता है या नहीं ।

आइये अब जानते हैं की आपको क्रेडिट कार्ड लेना चाहिए या नहीं ।

अगर आप बहुत ज्यादा ट्रेवल करते हैं, हर महीने शॉपिंग करते हैं या रेस्टोरेंट में हर महीने फैमिली के साथ लंच या डिनर करने जाते हैं। और आपके पास एक उच्च सैलरी वाली स्टेबल नौकरी है और आपको विश्वास है कि आप हर महीने बिना देरी किए क्रेडिट कार्ड के बिल भर सकते हैं, तो आप बिना चिंता के क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं। हां अगर आप सिर्फ रिवार्ड्स के लिए खाता खुला रहे हैं, तो फाइन प्रिंट को ध्यान से पढ़ें, जिसपे सारी नियम और शर्तें लिखी होती है।

लेकिन अगर आपके इनकम का स्रोत स्थिर नहीं है, और उतार चढ़ाव होते रहते हैं या आप अपने पैसे को लेकर बहुत बचत करने के आदि हैं और अपने पैसे को स्टॉक्स, मिचुएल फंड में ब्याज के जरिए कमाई के लिए निवेश करते हैं, तो आप क्रेडिट कार्ड न ही लें, तो अच्छा रहेगा, क्योंकि जितना आप वहां अपने स्टॉक्स से कमाई करेंगे, उससे ज्यादा ही ब्याज क्रेडिट कार्ड में लग जाएगा।

संक्षेप और साफ शब्दों में कहें तो क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने का मतलब ,अपने ही पैसे पर बैंक को ब्याज देना है।

उम्मीद है की आप क्रेडिट कार्ड के बारे मैं सब कुछ जान गए होंगे । और आपको पता चल गया होगा कि क्रेडिट कार्ड क्या होता है और क्या आपको इसकी जरूरत है या नहीं। कृपया अपने विचार कमेंट सेक्शन मैं बताएं ।

 

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