आजकल कोई सामान ऑर्डर करना हो, ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना हो, दोस्तों को पैसे भेजना हो या बिजली का बिल जमा करना हो। ये सब हमारे फोन और कम्प्यूटर से ही होने लगा है। जिसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता है। बस एक बटन दबाओ और पासवर्ड या पिन डालो और पैसे एक second मैं ट्रांसफर हो जाते हैं । ये ट्रांजेक्शन चाहे एक रुपए का हो या फिर एक लाख का, दोनों में इतना ही वक्त लगता है। एक गलती और आपके एक लाख रुपए पल भर में किसी और के हो जाएंगे। तो ऐसे में बहुत ज़रूरी है की आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधानी बरतें । इसीलिए आज हम आपको ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के तरीके बताएंगे, जिससे आपके साथ कभी कोई छल करके आपके पैसे न उड़ा ले जाए। आपको याद होगा कुछ समय पहले खबर आई थी, कि अरविन्द केजरीवाल जी की बेटी के क्रेडिट कार्ड से किसी ने पैसे निकाल लिए थे । इससे आप समझ सकते हैं कि ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम इस्तेमाल करते समय कितनी सावधानी बरतने की जरूरत है।

ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए आप इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपको कभी कोई ठग नहीं पाएगा।

अपने फोन को अपडेट कर के रखे।

चाहे आप कम्प्यूटर इस्तेमाल करते हो या स्मार्टफोन, इन दोनों में नियमित रुप से महीने दर महीने सोफ्टवेयर अपडेट आते रहते हैं। इसीलिए जैसे आपके डिवाइस पर सोफ्टवेयर अपडेट आए, आप तुरंत उसे डाउनलोड करके अपडेट करें। इससे होता ये है कि हाल फिलहाल में जो मोबाइल से डेटा चुराने वाले वाइरस बने होते हैं, उनसे आपका मोबाइल सुरक्षित हो जाता है। इसी के साथ आप अपने पेमेंट वाले ऐप को भी अपडेट करके रखें। यह भी बहुत जरूरी है, ताकि पैसे भेजते समय कोई ग्लिच की वजह से आपका ट्रांजेक्शन फेल न हो। क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि हम किसी को पैसे भेजते हैं, या फिर ऑनलाइन रिचार्ज करते हैं, तो हमारा ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है, लेकिन हमारे बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं और हमारा रिचार्ज भी नहीं होता है। इसी के साथ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय पब्लिक वाईफाई का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। रेस्टोरेंट, कॉफी शॉप, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर जो वाईफाई मिलता है उसी को पब्लिक वाईफाई कहते हैं।

हमेशा वेरिफाइड Application ही इस्तेमाल करें ।

जब भी कोई नया app डाउनलोड करें, तो हमेशा प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से प्रमाणित app ही डाउनलोड करें। जब आप एक नया एप सबसे पहली बार खोलते हैं तो वो app आपसे कुछ अनुमति मांगती है जैसे कि आपके स्टोरेज को एक्सेस करने का पर्मिशन, आपके कॉन्टेक्ट को देखने का पर्मिशन, आपके फोन से कॉल करने का पर्मिशन, हर एप ऐसी ही कुछ पर्मिशन मांगती है। पर्मिशन देते वक्त आप ध्यान रखें कि कौन सा app है और उसको कितनी पर्मिशन देने की जरूरत है। जैसे कोई फोटो एडिट करने वाली app अगर आपसे कॉन्टेक्ट और कॉल का पर्मिशन मांग रही है तो बिल्कुल भी ऐसे पर्मिशन को allow न करें। जरा सोचिए दोस्तों एक फोटो एडिट करने वाली app को बस स्टोरेज की ही जरूरत पड़ेगी न। वो आपका कॉन्टेक्ट लेकर क्या करेगी? स्कैमर और हैकर लोग ऐसे नॉन financial app के जरिए ही आपके डिटेल्स इकट्ठा करते हैं और फिर मौका मिलने पर उसी जानकारी का इस्तेमाल करके आपको चूना लगा जाते हैं।

निजी जानकारी को निजी ही रखें, सोशल न बनाएं।

बहुत से लोग ऐसा करते हैं कि अपना मोबाइल नंबर सीधे फेसबुक या इंस्टाग्राम के पोस्ट में पोस्ट कर देते हैं। ये चीज करना बेवकूफी का निम्न स्तर है। बताईए कौन अपना फोन नंबर ऐसे देता है। जन्म की तारीख बताने में तो कोई खतरा नहीं है लेकिन कुछ लोग ऐसा करते हैं कि अपने जन्मदिन के साल के बारे में भी बता देते हैं। जैसे कि मेरा जन्म 5 जनवरी 2005 को हुआ था। कुछ ऐसे ही और निजी जानकारी, जैसे कि आपके माता पिता का नाम, स्कूल-कॉलेज का नाम कभी भी सोशल मीडिया पर ऐसे ही न पोस्ट करें, और ना ही किसी अंजान को ये सब बताएं। हैकर और स्कैमर फ्रॉड करने में पीएचडी करके रखें होते हैं। वो आपकी इन्हीं जानकारियों की मदद से आपके अकाउंट को एक्सेस कर सकते हैं और रातो रात आपके पैसे उड़ा सकते हैं।

अपने पासवर्ड को अपनी पर्सनैलिटी से अलग रखें।

बहुत लोग अपने पासवर्ड में अपने ही बारे में कुछ लिख देते हैं, जैसे कि अपना नाम या जन्म तिथि, ताकि उन्हें अपना पासवर्ड याद रहे, लेकिन यहीं पर वो गलती कर बैठते हैं। क्योंकि ऐसे पासवर्ड का हैकर लोग आपकी निजी जानकारियों की मदद से आसानी से अनुमान लगा सकते हैं। इसीलिए अपने पासवर्ड में अपनी निजी जानकारी बिल्कुल भी न डालें। अपने पासवर्ड में नंबर , अल्फाबेट और स्पेशल कैरेक्टर जैसे चिन्ह इस्तेमाल करें। अपने पासवर्ड को कम से कम आठ कैरेक्टर का रखें और उसे अपनी कॉपी में लिख कर रख लें ताकि आप उसे भूल न पाए। जितना पासवर्ड आपकी सेफ्टी के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भी जरूरी है। ये ओटीपी आपके फोन या ईमेल पर आता है, जब आप किसी ऐप या वेबसाइट में लॉगिन करते हैं, या कोई ट्रांजेक्शन करते हैं । इसीलिए ओटीपी हो या पासवर्ड किसी को कभी न बताईए। चाहे सामने वाला बैंक अधिकारी होने का ही दावा क्यों न कर रहा हो। क्योंकि कोई भी बैंक अधिकारी या कंपनी का कर्मचारी कभी भी, आपसे ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगते हैं। अपना पासवर्ड हमेशा सुरक्षित वेबसाइट पर ही डालें।

हमेशा https वेबसाइट पर ही login करें।

कई बार ऐसा होता है कि लोग क्लोन किए हुए वेबसाइट पर लॉगइन कर लेते हैं, जो कि हुबहू असली वेबसाइट के जैसे ही दिखने में लगता है। इधर आप इस नक़ली वेबसाइट पर लॉगइन कर रहे होते हैं और उधर बैठा कोई हैकर आपके पासवर्ड देते ही original वेबसाइट पर आपके अकाउंट में लॉगिन कर जाता है। इससे बचने के लिए आप जब भी किसी एप को खोलें तो उसके शुरू में तीन डब्ल्यू से पहले चेक करें कि http लिखा है या https लिखा है। अगर https लिखा है तो वो वेबसाइट सेक्योर और सुरक्षित है, लेकिन अगर उस वेबसाइट के आगे सिर्फ http लिखा है तो आप समझ जाइए कि आपका डेटा सुरक्षित नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय भी ऐसे क्लोन किए हुए वेबसाइट से बचने की जरूरत है। जब भी आपको साठ हजार का फोन छः हजार में मिलने का विज्ञापन दिखे तो, अपनी किस्मत पर खुश होने से पहले ठहर के देखे कि वेबसाइट का नाम क्या है? ऐसे वेबसाइट पर आप क्लिक ही‌ न करें। अगर कर भी दिया तो अपनी कोई भी सही जानकारी वहां पर न दें।

अनहोनी हो तो Customer Care से संपर्क करें।

ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड नंबर बिल्कुल भी सेव न करें। लोग आसानी के लिए अपना कार्ड शोपिंग करते समय उस वेबसाइट पर ही सेव कर देते हैं। इससे उनको अगली बार शॉपिंग करते समय आसानी तो होती है लेकिन साथ ही साथ हैकर को भी आसानी हो जाती है। मान लीजिए कि जिस वेबसाइट पर आपने अपना क्रेडिट कार्ड सेव करके रखा है, वो वेबसाइट हैक हो जाए, या फिर आपका वो अकाउंट हैक हो जाए तो आपके कार्ड का एक्सेस भी उसे मिल जाएगा। इसीलिए अपना कार्ड कहीं सेव करके न रखें। वैसे तो ये आपके साथ कभी न हों, लेकिन अगर कभी किसी ने आपके क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से पैसे निकाले तो आप तुरंत अपने कार्ड को ब्लॉक करें। जब भी हम एटीएम मशीन से या फिर ऑनलाइन कार्ड से पेमेंट करते हैं तो हमें हमारे फोन नंबर पर एक मैसेज आता है। जिसमें कार्ड को ब्लॉक करने का नंबर दिया रहता है, जिससे आप आसानी से उसी वक्त अपने कार्ड को ब्लॉक कर सकते हैं। ऐसा करने से आप अपने खाते में बचे हुए पैसे बचा सकते हैं। इसके बाद जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी अपने बैंक को इसकी जानकारी दें।

ये कुछ बातें थी जो हमने आपको बताने की कोशिश करी है ताकि आपके साथ कभी कोई फ्रॉड न हों और आपकी मेहनत से कमाए गए पैसे कोई यूंही आप से छीन न जाए।

आजकल के इस आधुनिक दुनिया में जिस गति से हमारी टेक्नोलॉजी बेहतर हो रही है, उतनी ही तेजी से फ्रॉड और स्कैम के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। कभी आपको व्हाट्स एप पर केबीसी में लौटरी जीतने पर हजारों लाखों रुपए का ईनाम दिया जाता है। तो कभी आपको फोन या ईमेल के जरिए आपसे आपकी निजी जानकारी जैसे, नाम, पता, और बैंक खाते का नंबर जानने की कोशिश करते हैं। फिर भले चाहे आपने केबीसी के लिए कभी रजिस्ट्रेशन भी न किया हो। ईमेल पर जब आपको ठगने की कोशिश करी जाती है, तो यहां पर ललचाने वाला रकम करोड़ों में होता है, ताकि आप लुभा जाएं और जो दस या बीस हजार रुपए उन्होंने आपको ईनाम देने से पहले मांगा है, वो आप उन्हें बिना सोचे समझे दे जाएं। तो अगर आपको ऐसा कोई ईमेल आए तो सावधान रहिएगा।

आशा है की आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधानी बरतेंगे, और ऊपर बताये गए बातों का ध्यान रखेंगे ।

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